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									Rangin Kahani Forum - Recent Posts				            </title>
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            <description>Rangin Kahani Discussion Board</description>
            <language>en-US</language>
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                        <title>Нужен совет по выбору оптимального варианта</title>
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                        <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 22:38:47 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[Всем привет. Столкнулся с задачей и пока не могу определиться с оптимальным решением. Вариантов несколько, у каждого свои плюсы и минусы. Хотелось бы услышать мнение тех, кто уже проходил че...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[Всем привет. Столкнулся с задачей и пока не могу определиться с оптимальным решением. Вариантов несколько, у каждого свои плюсы и минусы. Хотелось бы услышать мнение тех, кто уже проходил через это. Что в итоге оказалось самым практичным в долгосрочной перспективе? Буду благодарен за любые рекомендации и личный опыт.]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://ranginkahani.fun/community/"></category>                        <dc:creator>DonaldVam</dc:creator>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/14/#post-134</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:31:21 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 66
ये रितु की जवानी का ही कमाल था जो रमण सेह न सका और अपना लावा उगल बैठा।झड़ने के बाद भी रमण का लंड सख्त ही रहता है। रितु रमण के लंड पे फैले हुए उसके रस को अच्छी तरह चट टी है और अपनी ज...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 66</strong></p>
<p dir="auto">ये रितु की जवानी का ही कमाल था जो रमण सेह न सका और अपना लावा उगल बैठा।<br />झड़ने के बाद भी रमण का लंड सख्त ही रहता है। रितु रमण के लंड पे फैले हुए उसके रस को अच्छी तरह चट टी है और अपनी जुबान उसके लंड पे फिराने लगती है नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे। रितु की जुबान का स्पर्श रमण के अंदर आग भर देता है और उसका लंड झटके मारने लगता है। रितु रमण के लंड को मुँह में भर लेती है और चूसने लगती है।<br />आह आह आह आह<br />रमण सिसकने लगता है।<br />रितु थोड़ी देर तक रमण का लंड चूसती है और फिर जब उसका जबड़ा दुखने लगता है तो वो रमण के लंड को मुँह से निकाल कर उसकी बगल में लेट जाती है। रितु के उरोज, गले और पेट पर रमण का वीर्य चमक रहा था।<br />रमण आज फुल मस्ती के मूड में था। वो बिस्तर से उठ कर अपनी अलमारी से रेड वाइन की बोतल निकालता है। रमण के हाथ में बोतल देख कर रितु मुस्कुरा उठती है और रमण को छेड़ती है।<br />‘अब भी क्या आपको इस की जरूरत है?’<br />‘मेरी जान तुम्हारे होंठों से इसे पीकर जो नशा चढ़ेगा, उसका मजा ही कुछ और होगा’<br />‘ओह हो, बड़े खतरनाक इरादे हैं जनाब के, लगता है आज मेरी खैर नहीं- चलो आज अपने प्रेमी की ये इच्छा भी पूरी कर देती हूँ’<br />रमण उसके पास आता है और से अपनी गोद में बिठा लेता है इस तरह कि रमण का लंड उसकी चूत को छूने लगता है और उसके उरोज रमण के चेहरे के पास होते हैं।<br />रमण बोतल खोलता है दो लंबे घूँट भरता है और फिर रितु को बोतल पकड़ाता है। रितु एक घूँट भरती है और रमण के होंठों से अपने होंठ लगा कर उसके मुँह में वाइन उड़ेल देती है जिससे रमण अपने मुँह में घुमा कर फिर रितु के मुँह में डाल देता है और रितु उसे पी जाती है।<br />साथ ही साथ रितु अपनी चूत रमण के लंड पे घिसती रहती है।<br />दोनों इसी तरह धीरे धीरे वाइन एक दूसरे को पिलाते हैं, एक दूसरे के होंठ चूसते हैं।<br />एक तरफ वाइन का नशा और दूसरी तरफ जिस्मों का नशा, दोनों की आँखें लाल हो जाती हैं और जैसे ही बोतल खत्म होती है रमण उसे बिस्तर पे लिटा देता है और फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू कर देता है।<br />रितु सिसकती है, और उसके अंदर की ज्वाला उसे जलाने लगती है, वो रमण को अपने ऊपर खींचती है।<br />रमण उसकी मंशा समझ जाता है और अपने लंड को उसकी चूत पे लगा कर घिसने लगता है। रमण का लंड रवि के मुकाबले में थोड़ा कम लंबा था और मोटा भी ज्यादा नहीं था। पर रितु अभी ज्यादा नहीं चुदी थी, इसलिए उसकी चूत अभी भी बहुत टाइट थी।<br />रमण अपने लंड को उसकी चूत में फंसा कर उसके ऊपर आता है और उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ कर एक धक्का मारता है।<br />रितु की चूत काफी गीली हो चुकी थी इस लिए रमण का लंड सरकता हुआ आधा अंदर घुस जाता है। रितु दर्द से बिलबिलाती है पर उसकी चीख रमण के मुँह में ही दब के रह जाती है।<br />रमण दूसरा झटका मार अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा देता है और रितु दर्द सेहती हुई रमण की पीठ पे मुक्कों की बरसात कर देती है।<br />रमण अब रुकता नहीं है और सटासट उसे चोदने लगता है। रितु दर्द से तड़पती रहती है करीब 5 मिनट बाद उसे राहत मिलनी शुरू होती है और मजा आने लगता है। रितु की गांड अपने आप ऊपर उठने लगती है और वो रमण के धक्कों का साथ देने लगती है।<br />रमण उसके निप्पल को मुँह में भर के चूसने लगता है और साथ साथ उसे चोदता रहता है। रितु के मुँह आजाद होता है और उसकी दबी हुई सिसकियाँ आजाद हो जाती हैं।<br />उफ फ उम उम ओह है आह आह आह<br />येस येस फास्टर फास्टर, जोर से और जोर से<br />चोदो चोदो और जोर से हम्म फक मी फक मी हार्डर<br />रितु की सिसकियाँ रमण को भड़काती रहती हैं और बुलेट ट्रेन की गति से दोनों के जिस्म टकराने लगते हैं।<br />दोनों के बदन पसीने से भर जाते हैं। रमण की गति उसे चोदने की और भी तेज हो जाती है।<br />दोनों अपनी चुदाई में इतना मस्त हो जाते हैं कि उन्हें समय का ज्ञान ही नहीं रहता और रवि कब घर में घुसा उन्हें पता ही नहीं चलता।<br />कमरे के बाहर खड़ा रवि दोनों को देख रहा था किस तरह पागलों की तरह दोनों चुदाई में मस्त थे।<br />जिस्मों के टकराने से थप थप की आवाज उठ रही थी और रितु की चूत फच फच फच का अपना ही राग निकाल रही थी।<br />रवि दोनों को देखता रहता है और उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। रितु की मस्ती भरी सिसकियाँ उसे जहर से भुजे तीर की तरह कानों में चुभती हुई महसूस हो रही थी।<br />रितु को चोदने के बाद उसके दिल में रितु की जगह कुछ और ही बन गई थी। पत्थर की तरह खड़ा खड़ा वो बस देखता ही रह जाता है।<br />दोनों अपने में मस्त चुदाई का आनंद ले रहे थे।<br />और दोनों ही झड़ने के करीब आ चुके थे, पहले रितु चीख मार के झड़ती है और अपने नाखून रमण की पीठ में धंसा कर उसके साथ चिपक जाती है। रमण भी ज्यादा देर का मेहमान नहीं था। 8-10 धक्कों के बाद वो भी अपना लावा रितु की चूत में छोड़ने लगता है जो रितु की चूत को मरहम की तरह सेंकने लगता है।<br />रमण रितु के ऊपर ही गिर पड़ता है और दोनों अपनी तेज चलती हुई साँसों को संभालने लगते हैं।<br />रवि भुजे मन से अपने कमरे में चला जाता है और जोर से दरवाजा बंद करता है।<br />‘भड़क’<br />ये आवाज रमण और रितु को होश में ले आती है। रितु की नजर जब दीवार पे लगी घड़ी पे पड़ती है तो शाम के 7 बज रहे थे, वो फटाफट बिस्तर से उठती है और बाथरूम में घुस जाती है और रमण भी फटाफट अपने कपड़े पहन लेता है। पर अभी उसकी हिम्मत नहीं होती कि वो कमरे से बाहर निकले।<br />रितु खुद को ठीक कर बाथरूम से बाहर आती है।<br />‘रात का खाना आप बाहर से मँगवा लेना, रवि आ चुका है, मैं उसके पास जा रही हूँ, आप मत आना मैं सब संभाल लूँगी’<br />रमण बिस्तर पे बैठा रह जाता है और रितु रवि के कमरे की तरफ बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/13/#post-133</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:31:08 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 65
उधर रमण का मन ऑफिस में बिल्कल नहीं लग रहा था, बार बार उसके सामने रितु का वो रूप आ रहा था जब घर जा कर उसने से अपनी चूत में उंगली करते हुए देखा था। चाहे उसे नशा चढ़ गया था पर फिर भी उ...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 65</strong></p>
<p dir="auto">उधर रमण का मन ऑफिस में बिल्कल नहीं लग रहा था, बार बार उसके सामने रितु का वो रूप आ रहा था जब घर जा कर उसने से अपनी चूत में उंगली करते हुए देखा था। चाहे उसे नशा चढ़ गया था पर फिर भी उसके होंठों के अहसास को वो महसूस कर रहा था अपने होंठों पे। वो बार बार अपने होंठों पे जुबान फेर रहा था और आँखें बंद कर रितु के होंठ अपने होंठ पे महसूस कर रहा था। उफ ये दोपहर कब होगी। कब जाएगा वो अपनी रितु के पास, उसकी चूत का रस पिएगा, उसके जिस्म के एक एक हिस्से पे अपनी मोहर लगाएगा।<br />उसका लंड पैंट में तूफान मचाने लगता है।<br />हे भगवान ये मैं क्या सोचने लग गया, वो मेरी बेटी है, कैसे मैं उसे वासना की निगाह से देख सकता हूँ। उफ कितना बड़ा पाप कर रहा था मैं। घिन आती है मुझे अपने आप से। पता नहीं क्या सोच रही होगी वो मेरे बारे में।<br />कुछ गलत नहीं कर रहा तू रमण, देखा नहीं था कैसे अपनी चूत में उंगली कर रही थी। अब उसे लंड चाहिए, कैसे वो रवि का नाम ले रही थी। तो क्या वो रवि से चुदना चाहती है। अगर रवि उसे चोद सकता है तो मैं क्यों नहीं। घर की बात घर में रहेगी। कह भी तो रही थी कि साबित करूँ मैं उसे प्यार करता हूँ। हाँ मैं साबित करूँगा कि मैं उसे प्यार करता हूँ। दुनिया में एक ही रिश्ता होता है लंड और चूत का, बाकी सब दिखावा है। हाँ बाकी सब दिखावा है।<br />रमण के अंदर एक जंग चल रही थी, और इस जंग में लंड जीत जाता है, अब उस से सब्र नहीं होता, वो तबियत खराब का बहाना बना कर बहल निकल पड़ता है। और सीधा एक ज्वेलर के पास जाता है और रितु के लिए बहुत अच्छे कानों के बूँदे खरीद लेता है और सीधा घर के लिए निकल पड़ता है।<br />घर पहुँच कर रमण बेल बजाता है, जैसे ही रितु को बेल सुनाई देती है वो अपने खयालों से बाहर आती है, उसे जैसे मालूम था कि बाहर रमण ही होगा, उसका चेहरा शर्म से लाल पड़ जाता है और हलके हलके कदमों से जा कर वो दरवाजा खोलती है, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी।<br />दरवाजा खुलते ही रमण जैसे ही रितु को देखता है उसका खड़ा लंड चिल्लाने लगता है, पकड़ ले और डाल दे चूत में। पर रमण पत्थर की तरह उसे देखता रह जाता है, रमण की चुभती हुई नजरें रितु बर्दाश्त नहीं कर पाती और पलट जाती है, वो सीधा किचन की तरफ बढ़ती है रमण के लिए पानी लाने के लिए।<br />लेकिन रमण वहीँ दरवाजे पे खड़ा रह जाता है, रितु का जानलेवा रूप जो उसने अभी देखा था वो उसकी आँखों में पर्दे की तरह छा जाता है और उसके कदम वहीँ जम जाते हैं।<br />रितु जब पानी ले कर आती है तो रमण को वहीँ दरवाजे पे खड़ा पाती है, उसे अपने हुस्न पे नाज होने लगता है।<br />रितु: ‘अरे क्या हुआ, आप वहाँ क्यों खड़े रह गए, अंदर आईये और दरवाजा भी बंद कर दीजिए। मैं पानी यहाँ रख रही हूँ और लंच का इंतजाम करती हूँ’<br />रमण: उन्न ओह (वो अंदर आ कर पानी पीता है और सोफे पे बैठ जाता है।)<br />रमण से बैठा नहीं जाता वो किचन में चला जाता है। अंदर रितु गैस पे खाना गर्म कर रही थी। रमण उसके पीछे आ कर उससे सट जाता है और रितु घबरा कर चीख पड़ती है और मुड़ के देखती है तो रमण था।<br />‘उफ आपने तो डरा दिया। जाइये हॉल में बैठिए मैं बस अभी खाना लेकर आ रही हूँ’<br />रमण फिर उसके साथ सट जाता है और उसकी कमर में हाथ लपेट लेता है और उसकी गर्दन को चूमने लगता है।<br />‘अकेला में वहाँ क्या करूँ, अपनी बेटी के साथ यहीं रहता हूँ’<br />रितु को रमण के खड़े लंड की चुभन अपनी गांड पे महसूस होती है और उसकी साँसे तेज हो जाती हैं।<br />‘आह्ह्ह्ह जाइये ना, क्या कर रहे हैं’<br />रमण उसकी मरमरी बाहों पे अपने हाथ फेरता है और उसके कंधे को चूम लेता है।<br />‘अपनी बेटी से प्यार कर रहा हूँ’<br />‘छोड़िये ना, पहले खाना तो खा लीजिए’<br />रमण उसे अपनी तरफ घुमाता है। रितु का चेहरा नीचे झुका होता है। चेहरे पे लाली छाई होती है।<br />रमण उसके चेहरे को ऊपर उठाता है, रितु अपनी आँखें बंद कर लेती है और रमण<br />‘आई लव यू जान’ कह कर उसके होंठों पे अपने होंठ रख देता है और हाथ पीछे ले जाकर गैस बंद कर देता है।<br />रितु के जिस्म में झुरझुरी दौड़ जाती है, वो पीछे हटना चाहती है पर रमण उसे अपने साथ चिपका लेता है। रमण उसे चूमता रहता है, रितु भी गर्म होने लगती है और उसके होंठ खुल जाते हैं। जैसे ही रितु के होंठ खुलते हैं रमण की जब अंदर चली जाती है जिससे रितु चूसने लगती है। रमण अपने हाथ पीछे ले जा कर उसकी गांड को अपनी तरफ दबाता है जिसकी वजह से उसका खड़ा लंड रितु की चूत पे दस्तक देने लगता है। अपनी चूत पे रमण के लंड का अहसास पा कर रितु सिसक पड़ती है पर उसकी सिसकी रमण के मुँह में ही दब के रह जाती है। दोनों गहरे फ्रेंच किस में डूब जाते हैं।<br />जब दोनों की साँसे फूलने लगती हैं तो दोनों अलग होते हैं। रितु का चेहरा उत्तेजना और शर्म से लाल सुर्ख हो जाता है। दोनों ही बहुत तेज तेज साँसे ले रहे थे। रितु रमण की आँखों में नहीं देख पाती और उसके सीने में अपना मुँह छुपा लेती है।<br />रमण गहरी गहरी साँस लेता हुआ रितु की पीठ सहलाता रहता है।<br />फिर रमण उसे अपनी गोद में उठा कर अपने रूम में ले जाता है और बिस्तर पे लिटा देता है।<br />रितु अपनी आँखें बंद कर के लेटी रहती है। और रमण अपनी शर्ट और बनियान उतार कर उसके साथ लेट जाता है।<br />रमण रितु के ऊपर झुकता है और फिर उसके होंठ चूसने लगता है। रितु भी स्का साथ देने लगती है और जैसे ही रितु की हाथ रमण को अपने घेरे में लेते हैं तो उसे रमण के नंगे होने का अहसास होता है, रमण की चौड़ी पीठ पे उसकी उंगलियाँ घूमने लगती हैं। रितु की उंगलियों का स्पर्श अपनी पीठ पे पा कर रमण के जिस्म में जलजला सा उठ जाता है और वो पागलों की तरह रितु के होंठ चूसने लगता है।<br />रितु के जिस्म में भी तड़प बढ़ती है पर जैसे उसे कुछ याद आता है और वो जोर लगा कर रमण की पकड़ से निकल जाती है।<br />रमण हैरान हो जाता है कि एकदम रितु को क्या हो गया। वो सवालिया नजरों से रितु को देखता है।<br />‘आप तो आते ही शुरू हो गए, पहले मेरे सवाल का जवाब तो दीजिए’<br />‘पूछो क्या पूछना चाहती हो’<br />‘कितना प्यार करते हो मुझ से? या सिर्फ मेरे जिस्म से ही खेलना चाहते हो?’<br />‘तुझे मेरे प्यार पे शक है क्या?’<br />‘एक बाप के नाते आपके प्यार पे कोई शक नहीं, उल्टा मैं तो खुद को खुशकिस्मत समझती हूँ कि मुझे और रवि को आप जैसा पापा मिला---- लेकिन जो आप करना चाहते हो मेरे साथ वो बाप बेटी में नहीं होता- वो सिर्फ दो प्रेमियों के बीच में ही होता है – तो इस लिहाज से आप मेरे प्रेमी बनना चाहते हो?’<br />‘हाँ’<br />‘लेकिन अगर मैं आप को अपना प्रेमी बना लूँ तो बदले में मुझे अपने प्रेमी से एक वादा चाहिए’<br />‘कैसा वादा?’<br />‘मैं जो भी माँगूँ वो आपको देना पड़ेगा’<br />‘क्या चाहती हो? माँग लो जो माँगना है’ रमण इस हालत में नहीं था कि वो रितु की किसी भी बात को मना कर सके, वो रितु को जल्द से जल्द अपनी बाहों में चाहता था।<br />‘मैं इस घर में खुल्ला वातावरण चाहती हूँ – यहाँ दो मर्द हैं और दो औरतें – कोई भी किसी के साथ कभी कभी चुदाई कर सकता है – पर कभी भी कोई जबरदस्ती नहीं करी जाएगी- क्या आप राजी हो?’<br />‘मतलब तुम रवि के साथ भी?’<br />‘ना सिर्फ मैं रवि के साथ जब दिल करे चुदाई करूँ, रवि भी मॉम के साथ जब दिल करे चुदाई कर सकता है, और जब हम दोनों का दिल करे हम दोनों आपस में चुदाई कर सकते हैं’<br />‘बोलो आप को मंजूर है?’<br />‘मुझे मंजूर है पर क्या तुम्हारी मॉम मानेगी?’<br />‘मॉम को मनाना मेरा काम है- आप बस अपनी मंजूरी दो’<br />‘ठीक है अगर तुम अपनी मॉम को राजी कर सकती हो, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं’<br />‘ओह पापा आई लव यू’ रितु रमण के सीने से चिपक जाती है।<br />रमण अपनी पैंट की जेब से बूँदे निकालता है और रितु को देता है।<br />‘है कितने प्यारे हैं- आप खुद ही पहनाओ अपनी प्रेमिका को’<br />रमण उसे बूँदे पहनाता है और रितु ड्रेसिंग टेबल पे जा कर खुद को निहारती है। रमण उठ के पीछे आता है और पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लेता है। उसकी नाइटी को कंधों से सरकाता है और उसके कंधे को चूमने लगता है।<br />‘आह्ह्ह्ह’ रितु सिसक पड़ती है<br />अब सारी दीवारें टूट चुकी थी, बाप बेटी का रिश्ता प्रेमी और प्रेमिका में बदल गया था।<br />‘ओह लव मी डैड’<br />‘नो मोर डैड’<br />‘येस, माय लव, लव मी’<br />और रमण रितु को अपनी तरफ घुमाता है। रितु प्यासी नजरों से रमण को देखती है और अपने होंठ आगे बढ़ा देती है। रमण उसके होंठ चूसने लग जाता है। रितु अपनी बाहों का घेरा रमण के गले में डाल कर उस से चिपक जाती है। रितु रमण के बालों को सहलाती हुई अपने होंठों का रस रमण को पिलाती रहती है।<br />रमण अपना एक हाथ उसके उरोज पे रख देता है और रितु काँप उठती है, उसकी चूत में खुजली मचने लगती है।</p>]]></content:encoded>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/13/#post-132</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:30:41 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 64
रितु बाथरूम में घुस कर अपने कपड़े उतारती है और खुद को लंबे कद के शीशे में निहारती है। रात की चुदाई के बाद उसकी चूत के लब खुल चुके थे, अपनी चूत को देख कर शरमा जाती है और फिर बाथटब तै...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 64</strong></p>
<p dir="auto">रितु बाथरूम में घुस कर अपने कपड़े उतारती है और खुद को लंबे कद के शीशे में निहारती है। रात की चुदाई के बाद उसकी चूत के लब खुल चुके थे, अपनी चूत को देख कर शरमा जाती है और फिर बाथटब तैयार कर उसमें घुस जाती है।<br />गर्म गर्म पानी उसकी देह को काफी सकून पहुँचा रहा था।<br />नहाने के बाद रितु अपने कमरे में आ कर अपना वार्डरोब खोलती है, कुछ देर अपने कपड़े देखती है, फिर कुछ सोच कर रमण के कमरे में चली जाती है और सुनिता का वार्डरोब खोलती है। काफी कपड़े तो सुनिता ले जा चुकी थी, पर कुछ फिर भी रह गए थे, उन कपड़ों में सुनिता की कुछ लिंगरी थी, जिनमें से उसने एक पहनी थी पहले। रितु सारी लिंगरी देखती है और उनमें से एक चुन लेती है।<br />गुलाबी रंग की लिंगरी, जिसका गला बहुत डीप था उसमें से उसके आधे उरोज दिख रहे थे। और लिंगरी की लंबाई सिर्फ उसकी गांड तक आ रही थी।<br />रितु गुलाबी रंग की पैंटी पहनती है और बिना ब्रा के लिंगरी पहन लेती है।<br />फिर किचन में जा कर लंच की तैयारी करती है और सारा इंतजाम करने के बाद अपने बिस्तर पे आ के लेट जाती है और अपने मोबाइल से सोनी को फोन करती है।<br />रितु: हाय सोनी, क्या कर रही है यार।<br />सोनी: कुछ नहीं यार बस अभी सो कर उठी हूँ, तू सुना कैसी रही कल।<br />रितु: काल तो मेरा काम हो गया, उफ क्या चुदाई करता है रवि।<br />सोनी: सच! जॉइन द गैंग बेबी।<br />रितु: तो क्या तू भी?<br />सोनी: हाँ मेरी जान, विमल का बस चले तो सारा दिन अपने नीचे रखे मुझे, लेकिन आजकल तो तेरी मॉम के पीछे पड़ गया है।<br />रितु: क्या मेरी मॉम के पीछे?<br />सोनी: तेरी मॉम के पीछे तो दोनों ही पड़े हैं मेरा बाप भी और भाई भी, यार है ही इतनी सेक्सी, कभी कभी तो मुझे डर लगता है कि तेरी मॉम के चक्कर में विमल मुझे छोड़ देगा।<br />रितु: नहीं यार लड़कों को बस चूत चाहिए होती है, कोई भी मिल जाए, देख लेना तेरी मारनी कभी नहीं छोड़ेगा।<br />सोनी: और सुना क्या चल रहा है।<br />रितु: यार डैड भी मेरे पीछे पड़ गए हैं। बड़ी मुश्किल से उन्हें रोका हुआ है।<br />सोनी: तेरे तो मजे हो गए, दूसरा लंड मिल रहा है।<br />रितु: यार पर डैड के साथ?<br />सोनी: तो क्या फर्क पड़ता है, मौसा जी के भी मजे हो जाएँगे और तुझे भी नया स्वाद मिल जाएगा।<br />रितु: नहीं यार डैड के साथ ठीक नहीं लगता, कल मॉम को पता चल गया तो?<br />सोनी: कुछ नहीं होता। मेरी मॉम को यहाँ अपने भाई से चुदवाऊँगी, तू वहाँ अपने डैड से चुद ले। मैं तो सोच रही हूँ, घर में माहौल ही ऐसा हो जाए, जिसका जिसके साथ दिल करे उसे चोद ले। कोई पर्दा नहीं। देख सब कितना खुश रहने लगेंगे।<br />रितु: हम्म बात तो सही है तेरी, पर मैं रवि से प्यार करने लगी हूँ।<br />सोनी: मैं भी तो विमल से प्यार करती हूँ। अगर वो मुझे बता कर किसी और को चोदेगा तो मुझे दुख नहीं होगा। उल्टा मैं उसकी मदद करूँगी, कहीं बाहर तो जा नहीं रहा, बस माँ और मासी के पीछे पड़ा है। सब अपने ही तो हैं क्या फर्क पड़ता है। उसे मौका दिलाने के लिए मैं सोच रही हूँ, डैड का लंड लेलूँ, तो डैड मेरे साथ बिजी हो जाएँगे और विमल को सही मौका मिल जाएगा।<br />रितु: सच में तू अपने डैड के साथ भी करेगी?<br />सोनी: हाँ, कौन सा मेरी चूत घिस जाएगी, और मजा दोनों को आएगा। भाई का काम भी बन जाएगा।<br />रितु: आज मैंने डैड को जल्दी आने के लिए बोला है, वो तो मौका ढूंढ रहे हैं मेरी लेने के लिए।<br />सोनी: लग जा मेरी जान और रात को फोन करके बताना क्या हुआ।<br />रितु: चल बाय, रात को कॉल करती हूँ।<br />सोनी: बाय, हैव अ नाइस फक।<br />फोन के बाद रितु सोचने लगती है कि वो रमण यानी अपने पिता के साथ कितना आगे बढ़े। अपने लिए उसकी आँखों में जो प्यास उसने देखी थी उसे देख कर वो अंदर ही अंदर बहुत खुश थी, और इस प्यास को बुझाने के लिए अगर वो रमण से कुछ भी माँगेगी तो वो ना नहीं कर पाएगा।<br />फिर वो सोनी की बातें सोचने लगती है, घर में माहौल ऐसा होना चाहिए, जिस्से चाहे चोद लो, कोई पर्दा नहीं, कोई शर्म नहीं, बिल्कुल एक दम खुल्ला वातावरण।<br />यानी एक ही बिस्तर पे वो रमण के साथ और रवि सुनिता के साथ फिर थोड़ी देर बाद जोड़ा बदल जाता है वह कितना मजा आएगा, एक ही दिन में दो लंड का मजा मिलेगा और चारों एक साथ भी तो कर सकते हैं, दोनों आदमी एक ही औरत को चोदें, एक चूत में डाले और दूसरा गांड में और मुँह में एक चूत।<br />उफ कितना मजा आएगा, सोच सोच कर रितु की चूत गीली होने लगती है।</p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://ranginkahani.fun/community/"></category>                        <dc:creator>Admin</dc:creator>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/13/#post-131</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:30:29 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 63
रमेश फटाफट चेकइन करवाता है। तीन कमरे एक लाइन में थे और कमरे की खिड़की नैनी लेक की तरफ थी, जिसका नजारा बहुत ही बढ़िया था।रमेश और काम्या तो सीधा बिस्तर में घुस जाते हैं नींद पूरी करने ...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 63</strong></p>
<p dir="auto">रमेश फटाफट चेकइन करवाता है। तीन कमरे एक लाइन में थे और कमरे की खिड़की नैनी लेक की तरफ थी, जिसका नजारा बहुत ही बढ़िया था।<br />रमेश और काम्या तो सीधा बिस्तर में घुस जाते हैं नींद पूरी करने के लिए। सोनी भी बिस्तर में घुस जाती है। पर सुनिता की आँखों से नींद उड़ चुकी थी। वो फ्रेश होती है और अपना जॉगिंग सूट निकाल कर पहन लेती है। जॉगिंग सूट में भी उसकी जवानी खिल रही थी। सुनिता रोज सुबह सुबह जॉगिंग करती है अपने जिस्म को फिट रखने के लिए।<br />होटल के पीछे एक घुमावदार पगडंडी जा रही थी, सुनिता उसी पगडंडी पे चली जाती है। पहाड़ों में सुबह सुबह की हवा बड़ी ताजी होती है। सुनिता उस सोंधी हवा का लुत्फ उठाते हुए चलती रहती है। जब सुनिता बाहर निकली थी तो विमल ने से जाते हुए देख लिया था, इस तरह वो अकेले निकल जाएगी कहीं, ये सोच कर विमल थोड़ा परेशान हुआ पर जब ध्यान से देखा कि स्ने जॉगिंग सूट पहन रखा है तो विमल ने भी फटाफट अपना शॉर्ट और टी-शर्ट पहनी और उसी दिशा में सुनिता के पीछे चल दिया।<br />15 मिनट के अंदर सुनिता काफी आगे निकल आई थी और वहाँ पेड़ों के जुरमुठ में उसे कुछ आवाजें सुनाई दी। सुनिता को थोड़ा डर लगा और वो पलट पड़ी।<br />वहाँ दो इस्राइली लड़के नशा कर रहे थे, जब उनमें से एक की नजर सुनिता पे पड़ी जो सुनसान रास्ते पे अकेले जॉगिंग कर रही थी तो वो अपने साथी को ले कर सुनिता के पीछे पड़ गए। अपने पीछे तेज कदमों की चाप सुन सुनिता ने भागना शुरू कर दिया, पर ढलान में नीचे की तरफ भागना इतना आसान नहीं था।<br />भागते हुए सुनिता का पाँव फिसलता है और वो सड़क पे गिर कर नीचे की तरफ लुढ़क पड़ती है। उधर से विमल भी उसी सड़क पे ऊपर की तरफ आ रहा था। उसकी नजर अपनी तरफ लुढ़कती हुई सुनिता की तरफ पड़ती है और पीछे दो फिरंगी लड़के भागते हुए दीखते हैं तो विमल सुनिता की तरफ भागने लगता है और इससे पहले वो सुनिता को थाम पाता सुनिता उस से टकरा जाती है और विमल का बैलेंस भी खराब हो जाता है और वो भी गिर पड़ता है। अब हालत ये थी कि दोनों एक दूसरे से सटे हुए लुढ़कते हैं और इस गिराव को रोकने के लिए विमल साइड में से बाहर निकली हुई चट्टान पे अपना पाँव फंसाता है। एक झटका सा लगता है, विमल का पाँव मुड़ता है उनके गिराव में रुकावट आती है पर सुनिता के जिस्म का जोर पड़ने की वजह से विमल के पाँव पे जोर पड़ जाता है और शायद उसके पाँव में मोच आ जाती। सड़क पे घिसटने की वजह से दोनों को काफी खरोंचे आ जाती हैं।<br />विमल को सुनिता के साथ देख वो दोनों फिरंगी पलट पड़ते हैं। अब विमल और सुनिता दोनों ही हाँफ रहे थे। जब साँस संभलती है तो सुनिता उठ के खड़ी होती है, अपने कपड़े झाड़ती है और हाथ बढ़ा कर विमल को सहारा देती है उठने के लिए। विमल उठ के जैसे ही अपने पाँव पे जोर डालता है उसकी चीख निकल जाती है दर्द के मारे। सुनिता फटाफट नीचे बैठ के देखती है, विमल का पाँव काफी सूज चुका था।<br />सुनिता विमल को सहारा दे कर किसी तरह होटल पहुँचती है और फटाफट डॉक्टर ऑन ड्यूटी को बुलवाती है। जब तक डॉक्टर आता होटल का स्टाफ विमल को सहारा देकर उसे उसके रूम में बिस्तर पे लिटा देते हैं।<br />जब तक डॉ. आता, सुनिता, विमल की सारी खरोंचे डेटॉल से साफ करती है और उनपे एंटीसेप्टिक लगाती है।<br />दर्द के बावजूद विमल को ठिठोली सूझती है<br />‘मासी डार्लिंग, यूँ ना अकेले फिरा करो, सबकी नजर से बचके करो, फूल से ज्यादा नाजुक हो तुम चाल संभल के चला करो…’<br />‘चुप, बहुत मुँह खुल गया है तेरा’<br />‘अरे मासी डार्लिंग नाराज क्यों होती हो, मैं तो बस यूँ ही तुम्हारा दिल बहलाने की कोशिश कर रहा था। अब जॉगिंग जाना हो तो इस बंदे को साथ ले लेना’<br />‘हाँ हाँ पहले ठीक तो हो ले, मेरी वजह से देख कितनी चोट आ गई तुझे’<br />‘मर्द लोग इतनी छोटी चोटों से नहीं डरते। कल तक ठीक हो जाऊँगा’<br />‘ओह हो तो साहिब अब मर्द बन गए हैं’<br />‘कोई शक!!’<br />इस से पहले आगे कोई बात होती डॉ. आ जाता है। विमल का पाँव अच्छी तरह चेक करता है, कुछ दवाइयाँ देता है और पाँव पर कम से कम 3 दिन तक जोर डालने के लिए मना करता है, साथ ही बर्फ की सिकाई बताता है।<br />डॉ. चला जाता है, सुनिता विमल को दवाई खिलाती है और फिर मिनीफ्रिज से बर्फ निकाल कर उसके पाँव की सिकाई करने लगती है। विमल की नजरें सुनिता पे टिक जाती हैं। सुनिता जब स्की तरफ देखती है तो अंदर ही अंदर सिहर जाती है। विमल की आँखों में उसे अपने लिए चाहत दिखाई दे रही थी। सुनिता अपनी नजरें तुरंत मोड़ती है और फिर 10 मिनट तक उसकी पाँव की सिकाई करती है।<br />सिकाई के बाद वो विमल से ये कह कर कि थोड़ी देर में आती है, अपने कमरे में चली जाती है और अपने जिस्म में लगी खरोंचों पे ध्यान देती है। डेटॉल से साफ कर हर जगह एंटीसेप्टिक लगाती है और अपने कपड़े बदल कर फिर विमल के कमरे में जाती है।<br />सुनिता ने स्ट्रेचेबल नीले रंग की जीन्स और हल्के पीले रंग का टॉप पहना था।<br />उफ कोई भी देख कर ये नहीं कह सकता था कि वो तीन बच्चों की माँ बन चुकी है। 20-22 साल की लड़कियों को सही टक्कर दे रही थी।<br />सुनिता जैसे ही विमल के कमरे में घुसती है, विमल का लंड बगावत कर देता है और शॉर्ट में उसे छुपाना आसान नहीं था। विमल झट से एक चादर अपने ऊपर डालता है।<br />‘अरे तू सोया नहीं। सो जा थोड़ी देर आराम मिलेगा’<br />‘नींद नहीं आ रही मासी’<br />‘चल मैं तुझे सुलाती हूँ’<br />और सुनिता उसके करीब बैठ कर उसके बालों को सहलाने लगती है। मजबूरन विमल अपनी आँखें बंद करता है और बंद आँखों के अंदर ही उसे सुनिता दिखाई देने लगती है। उसका लंड शॉर्ट में तूफान मचा देता है और उसका तंबू अब चादर भी छुपा नहीं पा रही थी।<br />सुनिता की नजर उस तंबू पे पड़ती है तो वही अटक जाती है। उठान इतना था कि विमल के लंड की लंबाई का अंदाजा लिया जा सकता था। इतना लंबा सोच कर सुनिता का कलेजा मुँह को आ जाता है। उसके पति रमण का तो कुछ भी नहीं था इसके सामने। फिर इस लंबाई का राज उसकी समझ में आ जाता है। रमेश का लंड भी काफी लंबा था तो उसके बेटे का तो होगा ही।<br />वो अपनी नजरें हटाने की कोशिश करती है, पर नजरें स्का साथ नहीं देती। विमल भी अपने खड़े लंड की वजह से कुछ परेशानी में आता है और करवट लेता है ताकि सुनिता के सामने उसका तंबू ना रहे। पर सुनिता के मन में तो खलबली मच ही चुकी थी।<br />चलें जरा देखें वहाँ रितु क्या कर रही है<br />इधर रितु सुबह उठ कर सबका नाश्ता बनाती है। रमण और रवि दोनों ही टेबल पे आ के बैठ जाते हैं।<br />रवि की नजरों में रितु के लिए अथाह प्यार का सागर था। और जैसे ही रितु की नजर रमण पे पड़ती है तो उसकी आँखों में उसे ग्लानि के साथ साथ की प्यास नजर आती है, रमण बार बार अपनी नजरें रितु के वक्षस्थल पर गड़ाता फिर हटाता जैसे उसके दिमाग में कोई जंग चल रही हो। धीरे धीरे वो ग्लानि का भाव उसकी आँखों से खत्म हो जाता है और वहाँ सिर्फ एक अनभुज प्यास दिखाई देती है, एक इल्तिजा दिखाई देती है।<br />रितु को रमण पे शायद तरस आ जाता है। जैसे ही रमण उठ कर ऑफिस के लिए निकलने लगता है।<br />रितु: पापा आज दोपहर में जल्दी आ जाना।<br />रमण जैसे ही ये सुनता है उसके भुझे चेहरे पे मुस्कान आ जाती है और वो निकल पड़ता है।<br />रमण के जाने के बाद।<br />रितु रवि से: भाई आज तो शाम को देर से आना।<br />रवि: क्यों क्या हुआ?<br />रितु: रात को बताऊँगी, अभी कुछ मत पूछ, और प्लीज वो पिल्स!!!<br />रवि: हाँ लेता आऊँगा, तू कॉलेज नहीं जा रही?<br />रितु: नहीं आज नहीं। कुछ काम है।<br />रवि उठता है और रितु को अपनी बाहों में भर कर उसके होंठ चूमने लगता है।<br />थोड़ी देर बाद रवि चला जाता है और रितु बाथरूम में घुस जाती है।</p>]]></content:encoded>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/13/#post-130</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:30:16 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 62
रितु बाथरूम जाने के लिए उठती है तो कमर में तेज दर्द होता है और वो तड़प कर गिर पड़ती है। साथ में लेटा रवि स्के ये हालत देखता है तो खुद उठा कर उसे बाथरूम में ले जाता है। गीजर चला कर पा...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 62</strong></p>
<p dir="auto">रितु बाथरूम जाने के लिए उठती है तो कमर में तेज दर्द होता है और वो तड़प कर गिर पड़ती है। साथ में लेटा रवि स्के ये हालत देखता है तो खुद उठा कर उसे बाथरूम में ले जाता है। गीजर चला कर पानी गर्म करता है। फिर उसकी सफाई कर के उसे थोड़ी देर गर्म पानी में लेटने के लिए कह कर बाहर आ जाता है।<br />आ कर देखता है कि बिस्तर पे खून के धब्बे पड़े हैं। वो फटाफट चादर बदलता है और उस चादर को अपने वार्डरोब में रख देता है।<br />फिर वो हॉल में जा कर दो पेन किलर लाता है और बाथरूम में घुस कर रितु को खिलाता है। रवि उसका ऐसे ध्यान रख रहा था जैसे अपनी बीवी का रख रहा हो। रितु की नजरें शर्म से झुकी रहती हैं।<br />थोड़ी देर गर्म पानी में सिकाई करने के बाद रितु को चैन मिलता है दर्द से। उसके दिल में रवि के लिए और भी प्यार बढ़ जाता है जो अहसास सिर्फ जिस्म की प्यास बुझाने से शुरू हुआ था वहाँ प्यार की कोपलें उगने लगती थी। अब उसे रमण का अपने करीब आना अच्छा नहीं लग रहा था। लेकिन रमण की आँखों में जो चाहत और प्यास उसने देखी थी, वो से बहुत परेशान कर रही थी। उसने सोच लिया था कि वो रवि से इस बारे में खुल के बात करेगी।<br />रितु बाथटब से बाहर निकल खुद को सुखाती है और हलके कदमों से बाहर निकल बिस्तर पे बैठे रवि को उसके होंठ पे छोटा सा किस करती है और गुड नाइट बोल कर अपने रूम में चली जाती है।<br />रवि तकिए को अपने सीने से लगा कर लेट जाता है। उस तकिए में रितु की सुगंध समा गई थी। आज पता नहीं कितने साल बाद वो चैन से सोया था क्योंकि आज उसे रितु मिल गई थी पूरी तरह से।<br />धीरे धीरे रितु के बारे में सोचते हुए वो भी नींद के आगोश में चला जाता है।<br />ये रात वही रात है जहाँ एक तरफ रितु रवि से चुद गई और दूसरी तरफ चलती हुई इनोवा में विमल सुनिता की गोद में सर रख के लेटा हुआ था।<br />सोये सोये विमल अपना चेहरा घुमा लेता है और अब स्की नाक बिल्कुल सुनिता की चूत के करीब थी। उसकी चूत से आती हुई खुशबू से विमल की नींद उड़ जाती है। विमल अपनी नाक सुनिता की चूत के ऊपरवाले हिस्से पे रगड़ने लगता है। ऐसा लग रहा था जैसे हिलती हुई कार की वजह से विमल हिल रहा हो। अपनी चूत के पास कुछ रगड़ता हुआ महसूस कर सुनिता की आँख भी खुल जाती है उसे विमल की नाक रगड़ने से मजा आने लगता है और स्की टाँगे अपने आप थोड़ी खुल जाती हैं। उसने पजामा सूट पहना हुआ था और उसकी पजामा बिल्कुल जिस्म के साथ चिपकी हुई थी। जैसे सुनिता अपनी टाँगे खोलती है विमल का चेहरा थोड़ा अंदर हो जाता है और विमल की नाक एक दम उसकी चूत पे आ जाती है। विमल गहरी गहरी साँस लेता हुआ उसकी चूत की सुगंध को अपने अंदर समा रहा था। सुनिता के हाथ उसके सर को अपनी चूत पे दबा लेते हैं।<br />बेध्यानी में सुनिता क्या करती जा रही थी, उसे पता ही नहीं था। अपने बेटे के सर को अपनी चूत पे दबा कर जैसे उसे बहुत शांति मिल रही थी। सुनिता के जिस्म में इस अहसास से उत्तेजना बढ़ जाती है। उसकी टाँगें और खुल जाती हैं और विमल के होंठ पजामी समेत उसकी चूत को अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगते हैं।<br />जैसे ही विमल के होंठ सुनिता की चूत को निगलने की कोशिश करते हैं, सुनिता से ये सुखद अनुभूति बर्दाश्त नहीं होती और अपने मुँह से निकलने वाली जोरदार सिसकी को दबा कर वो झड़ने लगती है। उसकी चूत से फव्वारा सा छूटने लगता है जो पजामी से रिस्ता हुआ विमल के मुँह में समाने लगता है। विमल वो सारा रस पी जाता है, पर अपना चेहरा वहाँ से नहीं हटाता।<br />सुनिता का शर्म के मारे बुरा हाल हो जाता है, आज उसका बेटा उसकी चूत का रस पी गया था। अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब उसका लंड उसकी चूत में समा जाएगा। ये खयाल आते ही सुनिता के जिस्म में फिर से एक नई उत्तेजना जन्म लेने लगती है और फिर से उसका हाथ विमल के चेहरे को अपनी चूत पे दबाने लगता है। थोड़ी देर में सुनिता फिर झड़ जाती है और फिर एक बार विमल को सुनिता की चूत का रस पीने को मिल जाता है। दोनों जानते थे कि दोनों जाग रहे हैं, पर दोनों ही इस बात से अनजान बने रहते हैं।<br />और थोड़ी देर बाद रात का वो सफर भी खत्म होता है। रमेश ने इनोवा होटल के पोर्च में लगा दी थी।</p>]]></content:encoded>
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				                    <item>
                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/13/#post-129</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:30:06 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 61
रितु अपनी नाइटी उतार फेंकती है और नग्न ही रवि के कमरे की तरफ बढ़ जाती है। रवि का कमरा खुला था, वो अंदर जा कर, दरवाजा अंदर से बंद कर लेती है।रवि अभी भी जाग रहा था। रितु को देख उसके च...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 61</strong></p>
<p dir="auto">रितु अपनी नाइटी उतार फेंकती है और नग्न ही रवि के कमरे की तरफ बढ़ जाती है। रवि का कमरा खुला था, वो अंदर जा कर, दरवाजा अंदर से बंद कर लेती है।<br />रवि अभी भी जाग रहा था। रितु को देख उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है। बिस्तर से उठ कर वो अपने कपड़े उतार देता है और रितु की तरफ अपने कदम बढ़ाता है जो अभी भी बंद दरवाजे के साथ खड़ी उसे देख रही थी।<br />रवि जैसे ही उसके पास पहुँच कर उसे बाहों में लेने की कोशिश करता है। रितु उसे रोक देती है। जी भर के रवि के नंगे रूप को देखती है और जब उसकी नजरें रवि के खड़े लंड पे पड़ती हैं तो शरमा कर नजरें झुका लेती है। रवि से और रुका नहीं जाता वो रितु को उठा कर बिस्तर पे लिटा देता है और उसके गुलाबी होंठों पे टूट पड़ता है, उसके होंठों का अहसास अपने होंठों पे पाते ही रितु भी तड़प कर उसका साथ देने लगती है।<br />दोनों भाई बहन एक दूसरे के होंठ चूसने लगते हैं। दोनों की जुबान आपस में लड़ने लगती है और रवि उसके उरोज दबाने लगता है।<br />आह्ह्ह्ह भाई धीरे दर्द होता है<br />रवि आराम आराम से उसके उरोज सहलाने लगता है।<br />उफ्फ्फ्फ्फ उम्म्म्म्म हाआआईईईईईई<br />रितु की सिसकियाँ निकलने लगती हैं। रवि उसके एक निप्पल को चूसने लगता है<br />आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उउउउउउईईईईईईईई म्म्म्म्म्माााा<br />रितु की चूत बहुत गीली हो जाती है और वो रवि के सर को नीचे की तरफ दबाने लगती है। रवि उसका इशारा समझ जाता है और उसके निप्पल को छोड़ कर सीधा उसकी चूत पे आ कर पूरा उसे मुँह में भर के चूसने लगता है।<br />आआआआआईईईईईईईई और चूस जोर से चूस आह्ह्ह्ह्ह मजा आ रहा है<br />उसकी चूत को चूसते चूसते रवि अपनी एक उंगल उसकी चूत में डाल देता है। पहली बार उसकी चूत में कुछ घुसा था। रितु दर्द से तड़प उठती है।<br />आह्ह्ह्ह्ह्ह निकाल दर्द हो रहा है<br />रवि निकालता नहीं पर तेजी से उसकी चूत में अपनी उंगल अंदर बाहर करने लगता है। थोड़ी देर बाद रितु को मजा आने लगता है और वो अपनी गांड उछालने लगती है।<br />रवि थोड़ी देर में अपनी पोजीशन बदलता है अब वो 69 के पोज में आता है। उसका लंड रितु के मुँह पे लहराने लगा। रितु उसके लंड को सहलाने लगी और फिर जब रवि ने अपनी कमर का जोर लगाया तो रितु ने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और अपनी जुबान फेर फेर कर उसे चाटने लगी।<br />आह्ह्ह्ह बेबी सक इट …<br />रितु को थोड़ी परेशानी हो रही थी, रवि फिर पोजीशन बदलता है, खुद नीचे आ जाता है और रितु को अपने ऊपर कर लेता है। अब रितु आसानी से उसका लंड चूस पा रही थी।<br />रवि का लंड चूसते चूसते रितु को अपने पापा रमण का खड़ा लंड दिखाई देता है, एक दिन वो भी उसके मुँह के अंदर होगा। सोच कर वो और भी उत्तेजित हो जाती है और जोर जोर से रवि के लंड को चूसने लगती है।<br />रवि को लगने लगा कि वो झड़ने वाला है, पर वो अभी रितु के मुँह में नहीं झड़ना चाहता था वो अपना लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लेता है और उसे अपने नीचे कर उसकी चूत पे अपना लंड घिसने लगता है।<br />रितु तड़प उठती है।<br />‘आह्ह्ह भाई और मत तड़पा अब डाल दे अंदर। चोद डाल अपनी बहन को।’<br />‘हाँ मेरी रानी अभी ले, थोड़ा दर्द होगा पहली बार, चिल्लाना मत।’<br />‘सह लूँगी तू डाल अंदर, अब नहीं रहा जा रहा’<br />और रवि अपना लंड उसकी चूत पे सेट कर के एक धक्का मारता है।<br />आआआआआआईईईईईईईईईईई<br />रितु की चीख निकल जाती है, आँखों से आँसू बहने लगते हैं।<br />रवि उसके होंठ चूसने लगता है और निप्पल उमेठने लगता है।<br />रितु की टाइट चूत में मुश्किल से उसके लंड का सुपाड़ा ही घुसा था अभी तक।<br />रवि बिल्कुल नहीं हिलता और उसके होंठ चूस कर उसके दर्द को कम करने की कोशिश करता है।<br />जब रितु थोड़ी शांत होती है तो रवि फिर एक झटका मार कर अपना आधा लंड उसकी चूत में घुसा देता है। दर्द के मारे रितु बिलबिला उठती है। उसकी चीख रवि के मुँह में ही घुल के रह जाती है और रवि फिर रुक जाता है। थोड़ी देर बाद जब रितु की कमर में हरकत होती है तो रवि अपने आधे घुसे लंड को ही अंदर बाहर करने लगता है। रितु की टाइट चूत में उसका लंड मुश्किल से ही हिल पा रहा था। रितु को दर्द के साथ थोड़ा मजा आने लगता है और उसकी चूत अपना रस छोड़ने लगती है।<br />रवि अब अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा देता है।<br />आह आह म उम हाँ चोद मुझे आह उफ मजा आ रहा है आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह<br />रितु जोर जोर से सिसकने लगती है। रवि तब उसके होंठों पे अपने होंठ रख के एक जोर का झटका मार अपना पूरा लंड अंदर घुसा देता है।<br />म्म्म्म्म्माााा<br />रितु फिर चीख पड़ती है पर रवि के होंठ उसकी चीख को कुचल देते हैं। रितु के आँसू फिर बहने लगते हैं। रवि अब उसके आँसू चाटने लगता है।<br />‘हो गया मेरी रानी, अब पूरा अंदर ले लिया है तूने। अब तुझे दर्द नहीं होगा फिर। बस थोड़ा और बर्दाश्त करले, फिर मजा ही मजा है।’<br />रवि अब उसके निप्पल चूसने लगता है।<br />थोड़ी देर बाद जब रितु अपनी गांड ऊपर उठाने लगती है, तो रवि उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पे रख लेता है और धीरे धीरे अपनी गति बढ़ाने लगता है।<br />रितु को ज्यादा मजा आने लगता है।<br />आह आह हाँ जोर से और जोर से फ्फ्फ्फ्फ उम्म्म्म येस येस फास्टर फास्टर भाई और तेज हाँ अंदर तक उफ्फ्फ्फ्फ उम्म्म्म उउईईईईईईई<br />रवि सटासट अपना लंड जोर से पेलने लगता है उसकी चूत में।<br />रितु दो बार झड़ जाती है, पर रवि रुकने का नाम नहीं लेता, वो एक मशीन की तरह रितु को चोदने लगता है।<br />रितु बार बार सातवें आसमान पे पहुँचती है और फिर नीचे आती है।<br />रवि भी अपने चरम पर पहुँचने लगता है, उसका लंड फूलने लगता है, जो रितु को अपनी चूत में महसूस होता है। वो समझ जाती है कि रवि झड़ने वाला है। पहले तो उसका दिल किया कि बाहर निकालने को बोले, पर उसे इतना मजा आ रहा था कि वो बहती चली जाती है और जैसे ही रवि के वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छूटने लगती हैं, उसकी गर्माहट से रितु फिर झड़ जाती है और कस के रवि से चिपक जाती है।<br />उसकी चूत रवि के लंड को जकड़ लेती है और एक एक बूँद अपने अंदर समाती रहती है।<br />रवि उसके ऊपर गिर पड़ता है और हाँफता रहता है। थोड़ी देर बाद जब रवि का लंड ढीला हो कर उसकी चूत से बाहर निकल पड़ता है तो रवि स्की बगल में लेट कर अपनी साँसे संभालने लगता है।</p>]]></content:encoded>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/12/#post-128</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 14:25:06 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 60
रवि उसके उरोज छोड़ कर नीचे बढ़ता है और उसकी जाँघें थाम कर हलके हलके चुम्बन कर के उसकी चूत की तरफ बढ़ता है।रितु के जिस्म में आग के शोले उठने लगते हैं उसकी सिसकारियाँ तेज हो जाती हैं।रव...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 60</strong></p>
<p dir="auto">रवि उसके उरोज छोड़ कर नीचे बढ़ता है और उसकी जाँघें थाम कर हलके हलके चुम्बन कर के उसकी चूत की तरफ बढ़ता है।<br />रितु के जिस्म में आग के शोले उठने लगते हैं उसकी सिसकारियाँ तेज हो जाती हैं।<br />रवि उसकी छोटी सी प्यारी चूत पे पहुँच जाता है जो बिल्कुल किसी संतरे की फाँक की तरह दिख रही थी और अपने छोटे होंठ खोल और बंद कर रही थी।<br />रवि की जुबान जैसे ही उसकी चूत को छूती है, रितु के जिस्म में एक झलझला आ जाता है। उसका जिस्म अकड़ जाता है और वो अपनी चूत से कर्मस की नदी ब्हा देती है, जिसे रवि चट्टे हुए पीने लगता है।<br />रितु का संखलन इतनी जोर का हुआ था कि उसकी आँखें मुंद गई और जिस्म ढीला पड़ गया।<br />रवि ने से थोड़ी देर के लिए छोड़ दिया ताकि वो अपने आनंद को अपने अंदर समेट सके।<br />अब रवि अपने सारे कपड़े उतार देता है और रितु के साथ लेट कर उसके पतले होंठों पे अपनी उंगलियाँ फेरने लगता है।<br />थोड़ी देर में रितु अपनी आँखें खोलती है, तो रवि उसकी नाइटी को उसके जिस्म से अलग कर देता है। रितु की नजर जब रवि पे पड़ती है तो शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर लेती है।<br />रवि उसके होंठ पे किस करता है।<br />‘रितु आँखें खोल ना’<br />रितु ना में सर हिलाती है।<br />रवि उसका हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखता है। रितु अपनी आँख खोल के देखती है फिर झट से बंद कर लेती है, और अपना हाथ हटाने की कोशिश करती है, उसके जिस्म में झुरझुरी दौड़ जाती है, रवि उसका हाथ हटने नहीं देता। धीरे धीरे रितु उसके लंड को थाम लेती है और अपने आप ही उसका हाथ उसके लंड को सहलाने लगता है।<br />रवि उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाता है और उसके होंठ चूसने लगता है। रितु की पकड़ उसके लंड पे सख्त हो जाती है। वो भी खुल के रवि का साथ देने लगती है। जिस्म में फिर चिंगारियाँ उठने लगती है।<br />रवि से धीरे धीरे लिटा देता है और उसके जिस्म के साथ चिपक जाता है। अपने साथ पहली बार रितु को किसी मर्द के नंगे जिस्म के सटने का अहसास हुआ था। उसके दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, साँसों में तेजी आ जाती है।<br />रवि की उत्तेजना भी बहुत बढ़ गई थी, पर वो खुद पे संयम रख कर बहुत धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था ताकि रितु को सम्पूर्ण आनंद मिले। रितु का हाथ अभी भी रवि के लंड पे था और वो धीरे धीरे उसे सहला रही थी, उसके जिस्म में इस वजह से रोमांच बढ़ता जा रहा था।<br />रवि उसके जिस्म के पर आ जाता है, उसके यौवन कलश को अपने हाथों में थाम उसके होंठ पे अपने होंठ रख देता है। रवि की लंड रितु के हाथ से छूट जाता है और वो उसके जिस्म को अपने साथ बीनच कर उसकी पीठ पे अपने हाथ फेरने लगती है।<br />रवि का लंड उसकी जाँघों के बीच में आ कर उसकी चूत का चुम्बन लेने लगता है।<br />उत्तेजना और डर दोनों ही रितु को हिला के रख देते हैं और वो पागलों की तरह रवि के होंठ चूसने लगती है। दोनों एक दूसरे में समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। उसकी सिसकियाँ रवि के होंठों के बीच अपना दम तोड़ती रहती हैं।<br />रवि उसके उरोजों का मर्दन करने लगता है। कभी दबाता है तो कभी निप्पल उमेठने लगता है। रितु की चटपटाहट बढ़ती है वो अपनी टाँगे बीनच कर रवि के लंड का अहसास अपनी चूत पे महसूस करती है। टाँगे खोलती है, बंद करती है। एक अजीब नशा उसपे चढ़ने लगता है, जिस से वो बिल्कुल अनजान थी। वो इस नशे में डूब जाती है और रवि से और चिपकने लगती है।<br />अचानक बाहर बड़ी जोर की आवाज होती है। दोनों भाई बहन होश में आते हैं। रितु बहुत घबरा जाती है, फटाफट अपनी नाइटी पहनती है, रवि अपना पजामा पहन कर बाहर निकलता है तो देखता है कि रमण फर्श पे गिरा पड़ा था।<br />रवि उसके पास जा कर उसे उठाता है। ‘क्या हुआ पापा, गिर कैसे गए।’<br />रमण: बस नींद में ध्यान नहीं रहा और ठोकर लग गई। आह्ह्ह<br />रवि: पापा ज्यादा लगी है क्या<br />रमण: लगता है कमर में मोच आ गई। मुझे बिस्तर तक ले चल और पानी की एक बोतल ले आ।<br />तब तक रितु भी आ जाती है और रवि के साथ मिल कर रमण को उसके बिस्तर पे लिटा देती है।<br />रितु: भाई तू पानी ले आ, मैं पापा की कमर पे आयोडेक्स मल देती हूँ, उन्हें आराम मिल जाएगा।<br />रवि जा कर पानी ले आता है। रमण पानी पी कर बिस्तर पे लेट जाता है।<br />रितु: भाई जा के सोजा, मैं पापा को आयोडेक्स लगा कर सोने चली जाऊँगी।<br />रवि का चेहरा उतर जाता है और वो चुप चाप अपने कमरे में चला जाता है। अब नींद कहाँ आनी थी। अभी भी उसे अपने जिस्म के साथ रितु के जिस्म का अहसास हो रहा था। वो बिस्तर पे करवटें बदलता रहता है।<br />इधर रितु की नाइटी वही थी, जिसमें उसका सारा जिस्म झलक रहा था। रमण की नजरें जब रितु पे पड़ती हैं तो फिर उसके अंदर वासना जागने लगती है, उसका लंड फिर खड़ा होने लगता है।<br />रितु उसकी कमर पे आयोडेक्स लगा के जाने लगती है तो रमण उसे अपने ऊपर खींच लेता है और रितु ऐसे गिरती है कि उसके होंठ रमण के होंठ से सट जाते हैं और रमण की बाहें उसे खुद से चिपका लेती हैं।<br />रमण पागलों की तरह उसके होंठ चूसने लगता है, रितु पहले से ही बहुत गर्म थी, तो वो भी रमण का साथ देने लगती है। दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगते हैं।<br />रमण की जुबान जैसे ही रितु के मुँह में घुसती है, रितु सिहर जाती है और कस के रमण को पकड़ लेती है और उसकी जीभ चूसने लगती है।<br />रमण अचानक अपना हाथ रितु के उरोज पे ले आता है तो रितु को एक झटका लगता है। वो रमण से अलग हो कर बैठ जाती है।<br />‘अभी आपने मेरे सवाल का जवाब देना है पापा। बस अब और इस से आगे नहीं’ कह कर रितु अपने कमरे में चली जाती है।<br />उसके दिमाग में अब तक जो हुआ वो घूमने लगता है, रवि से तो वो प्यार करने लगी थी, पर उसके पापा जो उसके साथ करना चाहते हैं वो उसे अजीब लग रहा था।<br />फिर दिमाग में खयाल आया कि जब वो भाई के साथ सब कुछ करने को तैयार है तो पापा के साथ भी कर सकती है, फर्क क्या पड़ेगा, दोनों ही तो घर के और उसके अपने हैं।<br />उसके चेहरे पे एक मुस्कान आ जाती है, उसे रवि का उतरा हुआ चेहरा याद आता है और उसके कदम उसे रवि के कमरे की तरफ खींचने लगते हैं।</p>]]></content:encoded>
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                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/12/#post-127</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 14:24:28 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 59
रवि के हाथ का कसाव रितु के उरोज पे बढ़ जाता है पर इतना भी नहीं कि रितु को दर्द महसूस हो और रितु के जिस्म में बेचैनी बढ़ जाती है।रितु की चूत से रस बह बह कर रवि के पजामा को गीला कर रहा...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 59</strong></p>
<p dir="auto">रवि के हाथ का कसाव रितु के उरोज पे बढ़ जाता है पर इतना भी नहीं कि रितु को दर्द महसूस हो और रितु के जिस्म में बेचैनी बढ़ जाती है।<br />रितु की चूत से रस बह बह कर रवि के पजामा को गीला कर रहा था। रवि उसे बिल्कुल एक नाजुक गुलाब के फूल की तरह ले रहा था, कहीं फूल की पंखुड़ी में कोई चोट ना आ जाए।<br />रितु के होंठ छोड़, रवि के होंठ रितु की गर्दन पे आ जाते हैं और वो बड़े प्यार से उसे चूमने और चाटने लगता है।<br />जिस्म में उठती हुई चिंगारियाँ रितु की सिसकियों का आह्वान करने लगती हैं और रितु खो जाती है रवि के प्यार में। रितु के हाथ भी रवि के जिस्म को सहलाने लगते हैं। कसा हुआ कसरती बदन छूने पे रितु खुद को संभाल नहीं पाती और फिर उसके होंठ रवि के होंठों से भिड़ जाते हैं।<br />जिस्म की प्यास से मजबूर रितु बहकती जा रही थी, पर फिर भी दिमाग का कोई कोना जागरूक था, जो इतनी जल्दी उसे आगे बढ़ने नहीं दे रहा था।<br />अचानक रितु अपने होंठ रवि से अलग कर लेती है।<br />वो रवि की गोद से उठ जाती है। रवि अवाक उसे देखता रह जाता है।<br />‘भाई मुझे माफ़ करना, शायद अभी मैं इस सब के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हूँ’<br />‘इधर आ मेरे पास बैठ’<br />ना चाहते हुए या चाहते हुए, बीच मझधार में फंसी रितु उसके पास बैठ जाती है।<br />‘गुड़िया मैं जानता हूँ तुझे क्या चाहिए- भरोसा रख तेरी मर्जी के बिना मैं कभी आगे नहीं बढ़ूँगा- मैं तब तक ठहर नहीं छोड़ूँगा जब तक तू खुद नहीं बोलेगी’<br />‘वादा’<br />‘हाँ वादा’<br />‘ओह भाई, आई लव यू, आई लव यू’ कहते हुए रितु फिर रवि को चूमने लगती है, वो पागलों की तरह रवि के चेहरे पे चुम्बनों की बौछार कर देती है।<br />रवि उसे धीरे से बिस्तर पे लिटा देता है। उसके मदमाते यौवन की चट्टा का रस पान करता है और उसके जिस्म को चूमने लगता है होंठों से नीचे गर्दन, गर्दन से नीचे उसकी छाती का ऊपरी हिस्सा फिर एक एक उरोज पर हलके हलके चुम्बन करता है। रितु के निप्पल सख्त हो नाइटी को फाड़ने की कगार पे पहुँच जाते हैं। रवि हलके हलके उन्हें चूमता है और फिर नाइटी समेत ही उन्हें चूसने लगता है।<br />उउउफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ ब्ब्ब्ब्भ्ह्ह्ह्ह्हाईईईई<br />क्या कर रहे हो………उउउईईईईईईई म्म्म्म्म्मुुुुुुम्म्म्म्म्म्मीईईईई<br />रवि धीरे धीरे दोनों निप्पल एक एक कर चूसता है, हलके हलके काटता है और बिना कोई जोर डाले हलके हलके उसके उरोज सहलाता है।<br />रितु का जिस्म तड़पने लगता है, एक डर उसके अंदर बैठ जाता है कि कहीं वो खुद ही तो वो रेखा नहीं तोड़ देगी जिसमें उसने रवि को बाँधा था। ऐसी होती है जिस्म की प्यास, जो इंसान को सब कुछ भुलाने पे मजबूर कर देती है।<br />काफी देर तक रवि उसके दोनों उरोज को अच्छी तरह चूसता है, पर बिना कोई दर्द दिए, सिर्फ अहसास और उत्तेजना की भावनाएँ रितु को तड़पाती रहती हैं, वो इतनी उत्तेजित हो जाती है कि नागिन की तरह बल खाने लगती है। उसके जिस्म का पोरे पोरे एक सुखद अहसास की अनुभूति से भर जाता है।<br />ब्ब्ब्ब्भ्ह्ह्ह्हाईईईईईईईई आआआआआईईईईई म्म्म्म्म्माााा<br />उसकी सिसकियों का जैसे बाँध टूट पड़ता है, शायद वो इस दुनिया से दूर कहीं और किसी और दुनिया में चली जाती है, रह रह कर उसकी कुलबुलाती चूत अपने अंदर उठती ज्वाला से उसे जला रही थी, मजबूर हो कर वो अपनी टाँगे पटकने लगती है।</p>]]></content:encoded>
						                            <category domain="https://ranginkahani.fun/community/"></category>                        <dc:creator>Admin</dc:creator>
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				                    <item>
                        <title>RE: जिस्म की प्यास</title>
                        <link>https://ranginkahani.fun/community/main-forum/%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8/paged/12/#post-126</link>
                        <pubDate>Sun, 18 May 2025 14:21:08 +0000</pubDate>
                        <description><![CDATA[अपडेट 58
ऋतु जब रवि के कमरे के बाहर पहुँच जाती है तो उसके कदम रुक जाते हैं। रमन के साथ हुई छेड़छाड़ ने उसे बहुत गर्म कर दिया था, उसकी चूत में खुजली मची हुई थी और पानी रिस-रिस कर जाँघों तक ब...]]></description>
                        <content:encoded><![CDATA[<p dir="auto"><strong>अपडेट 58</strong></p>
<p dir="auto">ऋतु जब रवि के कमरे के बाहर पहुँच जाती है तो उसके कदम रुक जाते हैं। रमन के साथ हुई छेड़छाड़ ने उसे बहुत गर्म कर दिया था, उसकी चूत में खुजली मची हुई थी और पानी रिस-रिस कर जाँघों तक बह रहा था।<br />वो जानती थी कि अगर वो अंदर गई तो आज कुंवारी नहीं रहेगी। क्या भाई के साथ आगे बढ़ जाए, दिमाग में बार-बार ये सवाल उठ रहा था। उसकी चूत चिल्ला-चिल्ला कर बोल रही थी कि आगे बढ़, पर दिमाग रोक रहा था। फिर अचानक दिमाग में बात आई कि अब तक वो क्या कर रही थी, अपने पापा के साथ, कैसे आधी नंगी होकर पापा के सामने चली गई थी, और चुदने में कौन सी कसर बाकी रह गई थी। वो तो पापा की ज़मीर को अगर उसने छेड़ा न होता, तो इस वक़्त पापा का लंड उसकी चूत की खुजली मिटा रहा होता।<br />आगे बढ़ ऋतु, रवि तुझसे सच में प्यार करता है, उसके प्यार में सिर्फ़ वासना नहीं है। अगर होती तो वो कब का इधर-उधर छूने की कोशिश करता। बेचारा सिर्फ़ फोटो के सामने मुठ मारता रहता है और आज पहली बार उसने 'आई लव यू' कहा था। बाद जा आगे, उसे उसका प्यार दे दे।<br />कैसे जाऊँ अंदर, वो मेरा भाई है, प्रेमी नहीं। भाई के साथ कैसे इतना आगे बढ़ूँ? भाई है तभी तो इतना प्यार करता है, और भाई प्रेमी क्यों नहीं हो सकता? घर की बात घर में, किसी से ब्लैकमेल होने का कोई डर नहीं। समाज में कोई बदनामी नहीं। होने दे आज संगम एक लंड और एक चूत का। तू लड़की है और वो एक लड़का, तुझे लंड चाहिए और उसे चूत।<br />ऋतु के कदम वहीं जम के रह गए। इतने में रवि ने दरवाज़ा खोल लिया, क्योंकि वो डर रहा था कि इतनी देर हो गई है, कहीं पापा ने ऋतु को... आगे वो सोच न सका। दरवाज़ा खोलते ही सामने ऋतु नज़र आई, जो इस वक़्त उर्वशी को भी मात कर रही थी। रवि उसके दिल की हालत समझ गया और हाथ बढ़ाकर उसका हाथ थाम लिया। रवि ने उसे अंदर की तरफ़ खींचा और ऋतु किसी मोम की गुड़िया की तरह खिंचती चली गई।<br />रवि ने उसके हाथ से बोतल लेकर वहीं टेबल पर रख दी। ऋतु की नज़रें नीचे ज़मीन पर गड़ी हुई थीं। जिस्म में कंपन हो रहा था। ऋतु के इस रूप को रवि न जाने कितनी देर तक देखता रहा और फिर आगे बढ़कर उसने ऋतु के चेहरे को पकड़ कर उठाया और उसकी आँखों में झाँकने लगा, जिसमें जिस्म की भूख के साथ-साथ कई सवाल भी दिख रहे थे।<br />ऋतु की नज़रें भी उसकी नज़रों से मिल गईं और दोनों जैसे अपनी नज़रों से ही बातें करने लगे।<br />‘आई लव यू ऋतु’<br />रवि के मुँह से निकल पड़ा और ऋतु तड़प के उसके सीने से लिपट गई। रवि की बाहों ने उसे अपने घेरे में ले लिया और एक अजीब सी ठंडक उसके सीने में समा गई। पता नहीं कब से वो तड़प रहा था ये तीन शब्द ऋतु से बोलने के लिए और आज बोल ही दिया, तब जाकर उसे थोड़ा चैन मिला। ऋतु जब उसे लिपटी तो ऐसा लगा जैसे संसार की सारी खुशियाँ उसे मिल गईं।<br />ऋतु के हाथ भी रवि की कमर के चारों तरफ़ बढ़ने लगे और उसने रवि को ख़ुद के साथ ऐसे चिपकाया जैसे डर लग रहा हो कि कहीं वो उससे दूर न चला जाए।<br />‘ऋतु’<br />ऋतु की साँसें ज़ोर-ज़ोर से चल रही थीं। रवि के होंठों पर अपना नाम उसे किसी मिश्री की तरह कानों में मिठास घोलता सा लगा। कितने प्यार से वो पुकार रहा था।<br />‘ऋतु’<br />‘हम्म’<br />‘आई लव यू’<br />‘एक बार और कहो ना’<br />‘आई लव यू, आई लव यू, आई लव यू’<br />‘सच?’<br />‘तुझे शक है मेरे प्यार पे?’<br />‘नहीं, पर डर लगता है’<br />‘किस बात का?’<br />‘हम भाई-बहन हैं, ये प्यार अगर अपनी सीमाएँ लाँघ गया तो क्या होगा? कब तक इसे छुपा के रख सकेंगे? जब मम्मी-पापा को पता चलेगा तब क्या होगा? जब हमारी शादी होगी तब क्या होगा?’<br />‘मुझ पर भरोसा है?’<br />‘नहीं होता तो यहाँ तक नहीं आती’<br />‘फिर मुझ पर छोड़ दे सब, मैं तुझ पर कोई आँच नहीं आने दूँगा, कभी तेरा साथ नहीं छोड़ूँगा’<br />‘ओह रवि, आई लव यू’<br />अब ऋतु ने अपना सिर उठाकर रवि की तरफ़ देखा। रवि के होंठ झुकने लगे, ऋतु की आँखें बंद हो गईं और जैसे ही दोनों के होंठ आपस में मिले, दोनों के जिस्म में एक बिजली की लहर दौड़ गई।<br />दोनों की धमनियों में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। साँसें एक-दूसरे में घुलने लगती हैं। जिस्मों का तापमान बढ़ने लगता है। ऋतु के होंठ खुल जाते हैं और रवि उसके होंठ चूसने लगता है, बिल्कुल आराम से, कोई जल्दी नहीं, जैसे मिश्री की मिठास चूस रहा हो। ऋतु के हाथ ख़ुद-ब-ख़ुद रवि के चेहरे को थाम लेते हैं और रवि के हाथ ऋतु की पीठ को सहलाने लगते हैं।<br />थोड़ी देर बाद ऋतु भी रवि का होंठ चूसने लगती है। दोनों बिल्कुल खो जाते हैं। समय जैसे रुक जाता है इन दोनों की प्रेम लीला को देखने के लिए।<br />जब साँस लेना दूभर हो जाता है तो दोनों अलग होते हैं और हाँफते हुए अपनी साँस सँभालने लगते हैं। रवि की नज़र टेबल पर पड़ी स्कॉच की बोतल पर जाती है और वो बोतल थामकर 3-4 घूँट मार लेता है और बिस्तर पर बैठकर ऋतु को अपनी गोद में बिठा लेता है।<br />दोनों अपलक एक-दूसरे को देखते रहते हैं और फिर जैसे एक बिजली कौंधती है, दोनों के होंठ फिर एक-दूसरे से चिपक जाते हैं और इस बार जुबानें आपस में अंगड़ाइयाँ लेने लगती हैं। दोनों एक-दूसरे का थूक पीते रहते हैं। रवि का हाथ रेंगता हुआ ऋतु के उरोज को थाम लेता है।<br />अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह भ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हाईiiiiiiii<br />ऋतु सिसक पड़ती है और ज़ोर से रवि के होंठ को चूसने लगती है।</p>]]></content:encoded>
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